Heera
* *हीरा**
पूर्ण हो चुका था
परिवार, शशि और कमल का!
तीन पुत्रो और एक पुत्री
के माता पिता बन कर!
माँगा ना होगा शायद,
चौथा पुत्र फिर!
पर नियति को कौन,
बदल सकता है?
राम के रचय को कौन
मिटा सकता है?
वो बालक जिसके आने की राह
ना तकी गयी होंगी!
बदल के रख देगा अपने परिवार की तस्वीर, क्या कभी किसी ने सोचा था!
वो तो करण बन के आया
शशि के आंगन में,
लेने कि किंचित चाह नही,
सिर्फ देना ही जिसने सीखा हो!
हर दिल को पढ़ लेने वाला,
सबका ख्याल रखने वाला,
कपट रहित, निश्चल मन,
पारदर्शी भीतर और बाहर।
वो कोई और नहीं,
हैं इस घर का राज दुलारा,
कमल किशोर की आँखों का तारा,
संगीता का प्राण प्यारा।
बड़े भाईयो का भरत
भाभियो के दिल का टुकड़ा,
बच्चो की हर ख्वाहिश पूरी करने वाला,
इस घर की रौनक, हमारा प्यारा दुलारा खुश!