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तुम्हारी कमी

स्कूल से जब थक कर आती,  और तुम्हारे फोन कि घंटी पर्स रखने से पहले ही बज जाती,  याद है मुझे कभी कभी तो कार भी नही पार्क कर पाती, पर तुम्हारा फोन बजने लगता कभी कभी थकान और परेशानियों से मैं झुझला भी जाती ! पर आज!  आज तो सिर्फ एक इंतज़ार ही रह गया है,  इंतज़ार तुम्हारे फोन का,  तुम्हारी आवाज़ का,  और फिर दूर तक खामोशी का!  हो तुम आस पास ही मेरे यह एहसास है मुझे,  पर दिखती नही, यही दर्द है मुझे।  तुम्हारे ना होने का दर्द कभी कम हो नही सकता तुम्हें एक पल के लिए भी भूल जाऊँ,  ये हो नही सकता।  तुम्हारी याद को दिल में समेट लिया है माँ,  तुम्हारे ना होने को *अब* हमने कबूल कर लिया है। माँ नम्रता

Till we meet again❤

My heart sinks when I realize that I lost you.  You were the first love of my life.  The true and real love Which had no demands, no expectations, no biases-ONLY LOVE.  Your love was like a canopy,  which protected me from all the storms.  Your love was that shield,  which helped me to grow in large.  I know that I have only lost your physical form  But you are there with me all the time ❤

True Companion

True Companion❤ In the crowd of people, one day I thought Of scrounging  A true companion I searched every nook and corner,  Surfed on Google, Instagram, Facebook and chat gpt!  But all my efforts to find a true companion went in vain.  Searched at home, my workplace and the surroundings.  Alas!  All my search was futile.  Then one fine day A voice called me and asked,  Whom are you searching?  I became oblivious to the voice.  Thinking that it must be my illusion.  Again, I heard it calling me.  Whom are you searching, my dear?  I could not stop, but replied I m looking for a true companion.  The voice said to me,  You are looking for something  which you never lost.  For I am your True companion Whom you were searching along. 

माँ

मन किया की आज  माँ के लिये कुछ लिखा जाए..  लिखने बैठी तो शब्दों ने कहा  मुझसे ना हो पाये..  पूछने लगे शब्द लिख पाऊँगी क्या उस *माँ* के बारे में जिसका ना कोई आदि  ना कोई अंत!!  अंततः दशा  देख मेरी आ गये  ये शब्द...  माँ के बारे में लिखना चाहती हो, अरे भोली ये क्या करना चाहती हो!  माँ..... जिसमे समाया सारा संसार!  कितनी करुणामयी हैं वो, सदा सिखाती अच्छी बात!   *पुष्पा* नाम है उनका जिनके कोख से आई मैं..  सहंशील, निर्मल, पवित्र और बहादुर मेरी माँ..  जीवन पथ पर चलने की राह दिखाती मेरी माँ...  इस दुनिया में सबसे ज्यादा स्नेह मुझसे करने वाली मेरी माँ...   *पुष्पा* के आंगन कि चिड़ीया... जब चली *शशि* कि बगिया में चहकने ..  हुई ना उसको किचिंत भि फिक्र,  होतीं भी कैसे?  *शशि* नाम था उनका जो थी विशाल हृदय की रानी..  बाह फैलाकर..  जिसने समा लिया अपनी बाहों में...  कभी न होने दिया एहसास सास होने का..  सदा किया माँ जैसा प्यार..  बैठी सोचने एक दिन मैं,  क्या हो सकता हैं...

सच्चा प्यार

*सच्चा प्यार*  क्या होता है सच्चा प्यार?  जाना एक उम्र के बाद,  छोटी थी तो लगता था करते है सब प्यार!  कुछ बड़ी हुई,  तो लगा यही है प्यार!  आज उम्र के इस   पराव पर एहसास हुआ यह तो नही था प्यार!  प्यार सिर्फ ढाई अक्षर से बना कोई शब्द नहीं!  इस के अंदर तो छुपी है,  सारी कायनात!  दिखाते थे जो प्यार,  और लगते थे अपने यार,  वही दिल ही दिल में जलते थे,  क्या इसी का नाम है प्यार?  आज जब सोचती हूं,  तब लगता है,  कितना झूठा था यह प्यार!  झूठ, इर्ष्या से भरा हुआ  निरंतर अपमान करने को तरसता उनका यह प्यार!  आज प्यार को लिखने बैठी तो याद आये वो दो नाम एक मेहेर का और दूसरा,  अपने मात पिता का!  यही है सच्चा प्यार जहाँ न कोई लेन देन,  ना इर्ष्या, ना अपमान!  हाँ, यही है सच्चा प्यार यही है सच्चा प्यार!

अतुलनीय

*अतुलनीय*  तुलना जिसकी हो नही सकती,  मान, समान, यश, और वैभव,  है जिसके पास,  जन्म से ही यशस्वी होने का  भाग्य जो लेकर आया था!  ज्येष्ठ होने का फर्ज़ जिसने निभाया था!  मुसीबतो से जिसने हार ना मानी!  सात फेरो का धर्म निभाया,  पत्नी को कोमा से बाहर लाया!  बच्चों पर अनुशासन इतना,  कि कोई  भी उद्दंड हो ना पाया!  पारिवारिक ज़िम्मेदारीयो को खूब निभाया!  ऐसे प्रिय बने लोगो के, कि दफ़्तर में भी नाम खूब कमाया!  संधी संधन के भी जो बने सहारे, हर मुसीबत में उनकी खड़े  होने वाले।  बहुयो को बेटो से ज्यादा प्यार करने वाले!  मौत को भी मात देने वाले,  जीवन की कठिनायियो से न कभी हारने वाले!  प्रेरणास्रोत, अनेको में एक हमारे *पापा* - जिनका नाम है  *   श्री कमल किशोर* !

जाने कहाँ गये वो दिन

जाने कहा गए वो दिन...  ना जाने कहाँ चले गये वो दिन,  जब थपकी देकर तुम्हे सुलाती थी,  ना सोने पर, कहानी सुनाती थी,  फिर भी ना सोने पर गुस्साती थी!  सो जाओ, जाना हैं कल स्कूल।  कब तुम्हे सुलाते सुलाते, और स्कूल भेजते भेजते तुम हो गये इतने बड़े?  आईना देखा तो नज़र आईं, अपनी हि कुछ झुरिया,  तब एहसास हुआ वक़्त का,  कब तुम आये मेरी गोद में और कब निकल गए,  पता ही नहीं चला,  यही तो जिंदगी हैं, यही तो जिंदगी हैं!  यही है माँ का सफ़र,  पहले तुम्हारे स्कूल से आने का इंतज़ार,  अब तुम्हारे शहर में आने का इंतज़ार!  इसी में कट जायेगी यह जिंदगी, इसी में कट जायेगी यह जिंदगी!   *Namrata*