सच्चा प्यार
*सच्चा प्यार*
क्या होता है
सच्चा प्यार?
जाना एक उम्र के बाद,
छोटी थी तो लगता था
करते है सब प्यार!
कुछ बड़ी हुई,
तो लगा यही है प्यार!
आज उम्र के इस पराव पर
एहसास हुआ
यह तो नही था प्यार!
प्यार सिर्फ ढाई अक्षर से बना कोई शब्द नहीं!
इस के अंदर तो छुपी है,
सारी कायनात!
दिखाते थे जो प्यार,
और लगते थे अपने यार,
वही दिल ही दिल में
जलते थे,
क्या इसी का नाम है प्यार?
आज जब सोचती हूं,
तब लगता है,
कितना झूठा था यह प्यार!
झूठ, इर्ष्या से भरा हुआ
निरंतर अपमान करने को तरसता
उनका यह प्यार!
आज प्यार को लिखने बैठी
तो याद आये वो
दो नाम
एक मेहेर का और दूसरा,
अपने मात पिता का!
यही है सच्चा प्यार
जहाँ न कोई लेन देन,
ना इर्ष्या, ना अपमान!
हाँ, यही है सच्चा प्यार
यही है सच्चा प्यार!