जाने कहाँ गये वो दिन

जाने कहा गए वो दिन... 

ना जाने कहाँ चले गये वो दिन, 
जब थपकी देकर तुम्हे सुलाती थी, 
ना सोने पर, कहानी सुनाती थी, 
फिर भी ना सोने पर गुस्साती थी! 
सो जाओ, जाना हैं कल स्कूल। 
कब तुम्हे सुलाते सुलाते, और स्कूल भेजते भेजते तुम हो गये इतने बड़े? 
आईना देखा तो नज़र आईं, अपनी हि कुछ झुरिया, 
तब एहसास हुआ वक़्त का, 
कब तुम आये मेरी गोद में और कब निकल गए, 
पता ही नहीं चला, 
यही तो जिंदगी हैं, यही तो जिंदगी हैं! 
यही है माँ का सफ़र, 
पहले तुम्हारे स्कूल से आने का इंतज़ार, 
अब तुम्हारे शहर में आने का इंतज़ार! 
इसी में कट जायेगी यह जिंदगी, इसी में कट जायेगी यह जिंदगी! 

 *Namrata*

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