क्या ग़लती हो गयी
क्या गलती हो गयी?
क्या गलती हो गयी मुझसे
बैठी सोचने एक दिन,
जिन लोगों के दिलो पर करती थी राज कभी,
आज उन्हीं के दिल से दूर हो गयी!
जो करते थे सबसे पहले याद मुझे,
आज वही भूल बैठे मुझे!
क्या गलती हो गयी मुझसे?
जो उन्हें बेरुखी हो गयी मुझसे!
दिल ने फिर दी एक आवाज़
नासमझ,
वक़्त रहता नहीं कही टिक कर,
इसकी आदत भी आदमी सी हैं!
कल तुम थे, आज कोई और,
और कल कोई और होगा!
यही गलती हो गयी तुमसे,
जो तुम समझ ना सके!
Namrata